Home Literature What is the definition of true Love – Sacha Prem Kya Hota hai!!!

What is the definition of true Love – Sacha Prem Kya Hota hai!!!

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What is the definition of true Love – Sacha Prem Kya Hota hai!!!

वक्त कितना जल्दी बीत जाता है मगर यादें हमेसा मन के भीतर अपना अस्थित्व जमाएँ रहती है”आज पूरे दो साल हो गएँ हमारे प्रेम को ना तुम्हारा प्रेम बदला और ना मेरा कुछ छोटी-मोटी अनबन हुई हैं मगर वे अनबन हमारे प्रेम को ओर भी मजबूत बनाती है”आज तुम मेरे पास तो नही है मगर मैं तुम्हें अपने पास महसूस कर तुम्हें यह प्रेम पत्र लिख रहा हूँ”तुम्हें याद है तुम जब पहली बार मुझे मिली थी किताबी सिलसिले में तुम किताबे पढ़ने की बहुत सौकीन हो और तुम मेरे पास आई थी एक बच्चे की तरह जिद्द कर रही थी कि मुझे वह किताब आज के आज पढ़नी है और तुमने चिल्ला कर मुझसे कहा था कि तुम वह किताब मुझे कहीं से भी लाकर दो और मैं जब तुम्हारा यह रवव्या देख रहा था तब मैं अपने दिमाग में सोच रहा था कि तुमने क्लास में मुझसे कभी बात नही की और आज एक किताब के लिये मुझपर दुर्गा रूप में क्रोध बरसा रही हो बस तब से ही मैं तुम्हें पसंद करने लग गया था”हालाँकि मैंने तुम्हें इस बारे में कभी बताया नही शायद इसलिए कि तुम्हें बताना मेरे लिएँ दोस्ती टूट जाने जैसा हो और तुम्हें याद है जब मैंने तुम्हें तुम्हारी पसंद वाली किताब लाकर दी थी तब तुमने मुझे तपाक से गले लगा लिया था और कहा था तुम कितने अच्छे हो उस दिन तुम्हारा पहली बार गले लगाना मेरे शरीर के सारे रोंगटे खड़े कर दिये थे वहीं बात आज भी याद आती है तो उसी दिन जैसी महसुसगी होती है शरीर को और तुम उसी दिन से मेरे साथ घुल-मिल गई थी मुझसे हर बात साँझा करने लगी थी कहीं मंदिर में भगवान के दर्शन को जाना होता तो तुम मुझे अपने साथ ले जाती थी और जब तुम और मैं साथ-साथ कदम मिलाकर बातें करते हुए चलते थे तब कितना सुहाना लगता था धीरे-धीरे हम कब प्रेम की कंद्राओ में गहरे जाने लगे पता ही नही चला और उसी प्रेम की दुनियाँ में हमने कितने नवीन पेड़ों को जन्म दिया कितने आवारा बधिर जानवरों को सुरक्षित स्थान दिया शायद आज वे मेरी तरह तुम्हें अवश्य याद करते होंगे तुम्हें याद होगा वो पेड़ जिस पेड़ की छाव में हमने पहली बार प्रेम किया था लेकिन दुःख की बात यह है कि तुम्हारे चले जाने के बाद उस पेड़ ने भी मेरा साथ छोड़ दिया सुख कर स्वयं को जला दिया शायद मुझसे ज्यादा दुःख तुम्हारे जाने का उसे हुआँ होगा।

मैं जानता हूँ कि तुम इस प्रेम पत्र को मुझे लिखते देख रही होंगी इसे तारों की आँख से पढ़ भी रही होंगी बस आँशु बहाना चाहती होंगी पर बहा नही पा रही होंगी और सुनो मैं भी यही चाहता हूँ तुम आँशु ना बहाओ क्यूँकि तुम्हारे आँशुओं में भीगना मुझे भी अच्छा नही लगेगा।

अच्छा सुनो…..सच कहूँ तो बहुत याद आती है तुम्हारी मन करता है चला आऊँ तुम्हारे पास मगर तुम्हारी दी हुई कसम आने नही देती जब से छोड़ कर चली गई हो मन का प्रेम भी तुम्हारे साथ चला गया है”कुछ अच्छा नही लगता तुम्हारे सिवा एक रात अच्छी लगती है”जो तुम्हें तारा बनाकर भेज देती हैं मुझसे बात करने के लिये और हा इस बार आओ तो जाने के लिये तो बिल्कुल मत आना मेरे साथ जिंदगी की अंतिम साँस तक प्रेम निभा कर जाना तुम्हारा प्रेमी ढ़ेर सारे प्रेम के साथ अपने खत को तुम्हारी उस किताब में समेट कर रख रहा है”जो तुमने मुझसे चिल्ला-चिल्ला कर मंगवाई थी।

Post Credit: Durgesh Joshi

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